Sunday, July 31, 2011

जिंदगी के अनगिनत पल यो ही बीत जाते है

जिंदगी के अनगिनत पल यो ही बीत जाते है
कुछ पल इतने पास रहते है की अक्सर याद आते है
कुछ पल बीती हूवी यादो में गूम हो जाते है
पलो का क्या है आते जाते रहते है

पर हर पल में कोई किस्सा छुपा होता है
जीवन का कोई न कोई हिस्सा छुपा होता है
भूलना चाहे कितना भी हम पर साथ इतना गहरा है
की सपनो में भी कई बार इन्ही पलों का पहरा रहता है

कितने ही पल में हम कितना ही मुश्कुराए
कितने ही पल में हम थोडा बहुत शर्माए
कितने ही पल में हम हल्का फुल्का घबराये

पर केवल अच्छे पल रखे और बाकि हटा दें
तो अलग सी हो जाएगी जिंदगी......
मानो बेरंग सी हो जाएगी जिंदगी.....
क्यूंकि जंगले में केवल पलाश नहीं उगते
यहाँ वहा घास फुश भी उग आते है
सच मनो तोह जंगल की शोभा बढ़ाते है


जीवन में हर पल अपने आप में भरपूर है

so enjoy each moment no matter how small.... how diluted ... how indifferent ... how far ......


8 comments:

Simran said...

Beautiful way of expressing! :)
Sweet poetry..

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.......

रश्मि प्रभा... said...

हर पल में कोई किस्सा छुपा होता है
जीवन का कोई न कोई हिस्सा छुपा होता है
भूलना चाहे कितना भी हम पर साथ इतना गहरा है
की सपनो में भी कई बार इन्ही पलों का पहरा रहता ... bahut hi komal, bauddhik anubhuti

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

anuj said...

thanks simran... well ur poems are do doubt with more expressions...

anuj said...

vasha ji... sukriya... apke vichar se utsaah badega....

anuj said...

rashmi ji... apka andaaj kaphi acha hai... sukriya,,, bahut bahut sukriya

anuj said...

sanjay ji... sukriya...

matar ke daane

matar ke daane..... nanhe gol gol se... hare, piley, niley se.... matar ke daane.... chil chil kar chilke se.... bhar rahe t...